Hale Dil Kisko Sunaye Naat Lyrics

Hale Dil Kisko Sunaye Naat Lyrics

 

 

Haal e Dil Kis Ko Sunaye Aap Ke Hote Hue
Kyun Kisi Ke Dar Pe Jaye Aap Ke Hote Hua

Me Gulam-e Mustafa Hun Ye Meri Pehchan Hai
Gham Kyun Mera Paas Aain Aap Ke Hote Hue

Ye To Ho Sakta Nahi Ye Baat Mumkin Hi Nahi
Mera Ghar Aalam Aain Aap Ke Hote Hue

Keh Raha Hai Aap Ka Rab ‘Anta Feehim’ Aapse
Kyun Inhe Du Me Saza e Aap Ke Hote Hue

Apna Jena Apna Merna Ab Isy Chokhat Pe Hai
Hum Kaha Sarkar Jaye Aap Ke Hote Hue

Me Ye Kaise Maan Jaun Sham Ke Darbar Me
Chhin Le Koi Rida-ae Aap Ke Hote Hue

Samne Hai Ae Ali Ke Laal Uswah Aap Ka
Kyun Kisi Ka Khof Khaye Aap Ke Hote Hue

Kon hai, Altaaf ! Apna Haal-E-Dil Jis Se Kahe
Zakhm-e-dil Kis Ko Dikha-ae, Aap Ke Hote Hue

 

 

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए
क्यूँ किसी के दर पे जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हूँ, ये मेरी पहचान है
ग़म मुझे क्यूँ-कर सताएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

अपना जीना, अपना मरना अब इसी चौखट पे है
हम कहाँ, सरकार ! जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कह रहा है आप का रब ‘अन्त फ़ीहिम’ आप से
क्यूँ इन्हें मैं दूँ सज़ाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

सामने है, ए ‘अली के लाल ! उस्वा आप का
क्यूँ किसी का ख़ौफ़ खाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ये कैसे मान जाऊँ ! शाम के दरबार में
छीन ले कोई रिदाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

ये तो हो सकता नहीं ! ये बात मुमकिन ही नहीं !
मेरे घर आलाम आएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कौन है, अल्ताफ़ ! अपना हाल-ए-दिल जिस से कहें
ज़ख़्म-ए-दिल किस को दिखाएँ, आप के होते हुए

शायर:
सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मी

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